प्रेम की ललक
एक प्रेम कथा.........
भाग 1
पुष्पिता की मां आज गुस्से में है l गुस्से में चेहरा बिल्कुल लाल था l कुछ बड़बड़ाते हुए कमरे से बाहर आती हैं l साथ में एक पीतल का लोटा था l अपने गीले बालों को तौलिए में लपेटकर आंगन में आईं l तुलसी के पौधे को जल देते हुए पुष्पिता का जिक्र कर रहीं थीं l उधर पुष्पिता भी अपने कमरे में बिस्तर पर ही बैठकर सिसकियां ले रही थी l उसका भाई गुलशन भी अपनी मां की तरफ से यह बोल रहा था l शायद आज गुलशन को भी पुष्पिता के खिलाफ बोलने की आजादी मिली है l पुष्पिता के सिसकियों की सिकन और आंसुओं में शायद मां के फटकार की उतनी झलक नहीं थी, जितना गुलशन की वजह से l आज पूरा परिवार एकाएक उसके खिलाफ था lपुष्पिता बिल्कुल अकेली और असहाय हो गई थी l
यह सब कुछ इसलिए क्योंकि कल शाम पुष्पिता श्यामदेव से मिलने चली गई थी l सहेली से मिलने के बहाने घर से निकली थी l मगर यह बात मां को कैसे पता चला इसी उहापोह में पुष्पिता का सारा दिन गुजर गया l दोपहर का खाना खाने से भी इनकार कर दिया था l लेकिन पिताजी के कहने पर थोड़ा चावल दाल उसने खा लिया l
दिन ढल गया परिवार में माहौल भी शांत हो चुका था l रात के खाने के बाद सभी अपने कमरे में सो गए l लेकिन बहुत कोशिश के बाद भी पुष्पिता को नींद नहीं आ रही थी l घड़ी की तरफ देखा तो 11:00 बज रहे थे l पुष्पिता ने अपने कमरे की लाइट जलाई और टेबल के अंदर से कुर्सी को खिंच कर बैठ गई l दराज़ से एक कोरा कागज निकाला और बगल में रक्खी दर्जनों कलम से श्यामदेव की दी हुई वो खास कलम निकाल कर पत्र लिखना शुरू किया l लिखते लिखते उसकी आंखों से आंसू छलक पड़े l लिखकर वापस बिस्तर पर लेट गई l
लेकिन अभी इसी उधेड़बुन में थी की आखिर अब यह पत्र श्यामदेव तक कैसे पहुँचाया जाए l सोचते ना जाने कब नींद आ गई पुष्पिता को पता भी नहीं चला l............
-------- अभिषेक तन्हा
Continued........
भाग 2:- Click here http://abhishektanha.blogspot.com/2020/04/2-l-l-l-l-l-700-l-l-l-l-l-l-l-l-l-l-l-l.html
#प्रेम_की_ललक
#काव्याग्नि
#अभिषेक_तन्हा
#abhishektanha
#abhishektiwaritanha
#kawyagni
एक प्रेम कथा.........
भाग 1
पुष्पिता की मां आज गुस्से में है l गुस्से में चेहरा बिल्कुल लाल था l कुछ बड़बड़ाते हुए कमरे से बाहर आती हैं l साथ में एक पीतल का लोटा था l अपने गीले बालों को तौलिए में लपेटकर आंगन में आईं l तुलसी के पौधे को जल देते हुए पुष्पिता का जिक्र कर रहीं थीं l उधर पुष्पिता भी अपने कमरे में बिस्तर पर ही बैठकर सिसकियां ले रही थी l उसका भाई गुलशन भी अपनी मां की तरफ से यह बोल रहा था l शायद आज गुलशन को भी पुष्पिता के खिलाफ बोलने की आजादी मिली है l पुष्पिता के सिसकियों की सिकन और आंसुओं में शायद मां के फटकार की उतनी झलक नहीं थी, जितना गुलशन की वजह से l आज पूरा परिवार एकाएक उसके खिलाफ था lपुष्पिता बिल्कुल अकेली और असहाय हो गई थी l
यह सब कुछ इसलिए क्योंकि कल शाम पुष्पिता श्यामदेव से मिलने चली गई थी l सहेली से मिलने के बहाने घर से निकली थी l मगर यह बात मां को कैसे पता चला इसी उहापोह में पुष्पिता का सारा दिन गुजर गया l दोपहर का खाना खाने से भी इनकार कर दिया था l लेकिन पिताजी के कहने पर थोड़ा चावल दाल उसने खा लिया l
दिन ढल गया परिवार में माहौल भी शांत हो चुका था l रात के खाने के बाद सभी अपने कमरे में सो गए l लेकिन बहुत कोशिश के बाद भी पुष्पिता को नींद नहीं आ रही थी l घड़ी की तरफ देखा तो 11:00 बज रहे थे l पुष्पिता ने अपने कमरे की लाइट जलाई और टेबल के अंदर से कुर्सी को खिंच कर बैठ गई l दराज़ से एक कोरा कागज निकाला और बगल में रक्खी दर्जनों कलम से श्यामदेव की दी हुई वो खास कलम निकाल कर पत्र लिखना शुरू किया l लिखते लिखते उसकी आंखों से आंसू छलक पड़े l लिखकर वापस बिस्तर पर लेट गई l
लेकिन अभी इसी उधेड़बुन में थी की आखिर अब यह पत्र श्यामदेव तक कैसे पहुँचाया जाए l सोचते ना जाने कब नींद आ गई पुष्पिता को पता भी नहीं चला l............
-------- अभिषेक तन्हा
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भाग 2:- Click here http://abhishektanha.blogspot.com/2020/04/2-l-l-l-l-l-700-l-l-l-l-l-l-l-l-l-l-l-l.html
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